गुप्त नवरात्रि (जैसे आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रि) में 10 महाविद्याओं और मां दुर्गा की विशेष साधना की जाती है। तांत्रिक और साधक जहाँ इसे बेहद कठिन नियमों के साथ करते हैं, वहीं सामान्य गृहस्थ जन भी अपने मनोरथ (मनोकामना) की पूर्ति के लिए इसे सरल विधि से कर सकते हैं।
गृहस्थों के लिए गुप्त नवरात्रि की सरल पूजन विधि नीचे दी गई है:
________________________________________
1. आवश्यक सामग्री
• मां दुर्गा या 10 महाविद्याओं की तस्वीर/मूर्ति
• कलश (मिट्टी, तांबे या पीतल का), नारियल, कलावा (मौली) और आम के पत्ते
• गंगाजल, रोली, अक्षत (साबुत चावल), फूल (विशेषकर लाल फूल)
• धूप, दीपक (घी या तिल का तेल), कपूर
• भोग के लिए फल, मिठाई, मखाने या हलवा-पूरी
________________________________________
2. घटस्थापना (कलश स्थापना) विधि
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जाती है:
• स्थान शुद्धिकरण: सुबह जल्दी स्नान कर साफ वस्त्र (लाल या पीले) पहनें और पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
• कलश की तैयारी: एक लोटे या कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं। कलश में जल, गंगाजल, एक सिक्का, सुपारी और लौंग डालें।
• नारियल रखना: कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर कलावा/चुनरी में लिपटा हुआ नारियल स्थापित करें।
• ज्वारे बोना: यदि आप चाहें तो मिट्टी के पात्र में जौ (ज्वारे) बो सकते हैं, हालांकि गुप्त नवरात्रि में गृहस्थों के लिए यह अनिवार्य नहीं माना जाता।
________________________________________
3. दैनिक पूजा विधि (सुबह और शाम)
गुप्त नवरात्रि में पूजा को जितना 'गुप्त' (शांत और बिना किसी आडंबर के) रखा जाए, इसका फल उतना ही अधिक मिलता है।
• दीप प्रज्ज्वलन: सर्वप्रथम पूजा घर में घी या तेल का दीपक और धूप जलाएं। आप चाहें तो 9 दिनों के लिए अखंड ज्योति भी जला सकते हैं।
• स्नान व तिलक: जल के छींटे देकर माता रानी और भगवान गणेश का प्रतीकात्मक स्नान कराएं। इसके बाद सभी स्वरूपों को रोली, चंदन और अक्षत का तिलक लगाएं।
• वस्त्र व श्रृंगार: माता रानी को लाल चुनरी या वस्त्र रूपी कलावा अर्पित करें और श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।
• भोग लगाना: प्रतिदिन सुबह और शाम को माता को फल, बताशे, सूखे मेवे या घर पर बने शुद्ध हलवे का भोग लगाएं।
________________________________________
4. पाठ और मंत्र जाप (सबसे महत्वपूर्ण)
गुप्त नवरात्रि में शारीरिक तामझाम से ज्यादा पाठ और मंत्र जाप का महत्व होता है। शांत मन से किसी एक समय को निश्चित कर लें और 9 दिनों तक उसी समय पूजा करें।
• दुर्गा चालीसा: प्रतिदिन दुर्गा चालीसा या दुर्गा कवच का पाठ करें।
• दुर्गा सप्तशती: यदि संभव हो तो दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। गृहस्थों के लिए 'सिद्ध कुंजिका स्तोत्र' का पाठ करना भी बेहद प्रभावशाली और संक्षिप्त माना जाता है।
• सरल मंत्र: यदि आप महाविद्याओं की कठिन साधना नहीं कर रहे हैं, तो मां दुर्गा के इस सिद्ध मंत्र का रुद्राक्ष की माला से 108 बार जाप करें:
"ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः"
(या फिर नवार्ण मंत्र "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" का जाप करें)
________________________________________
5. आरती और क्षमा प्रार्थना
पूजा के अंत में मां दुर्गा की आरती (जैसे: जय अम्बे गौरी...) करें और कपूर से आरती घुमाएं। पूजा में अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए हाथ जोड़कर माता रानी से क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।
________________________________________
6. व्रत का उद्यापन
अष्टमी या नवमी तिथि के दिन नौ दिनों के व्रत/पूजा का उद्यापन किया जाता है। इस दिन कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाकर भोजन (हलवा, पूरी, चना) कराएं, उनका आशीर्वाद लें और सामर्थ्य अनुसार भेंट देकर विदा करें।
विशेष नोट: गुप्त नवरात्रि के दौरान अपने विचारों को शुद्ध रखें, सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज का) ग्रहण करें और अपनी पूजा या मनोकामना का जिक्र बाहरी लोगों से न करें।
________________________________________
गुप्त नवरात्रि की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री की पूरी सूची नीचे दी गई है :--
1. मुख्य पूजा और कलश स्थापना के लिए
• मां दुर्गा या 10 महाविद्याओं की तस्वीर/मूर्ति
• कलश: मिट्टी, तांबे या पीतल का लोटा
• कलश के लिए सामग्री: गंगाजल, साफ जल, एक सिक्का, सुपारी, अक्षत (साबुत चावल) और हल्दी की गांठ
• आम या अशोक के पत्ते: कलश के मुख पर रखने के लिए (कम से कम 5 या 7 पत्ते)
• पानी वाला नारियल: कलश के ऊपर रखने के लिए
• कलावा (मौली): कलश पर बांधने और रक्षासूत्र के लिए
• लाल चुनरी या लाल कपड़ा: माता रानी को ओढ़ाने और चौकी पर बिछाने के लिए
2. पूजन और श्रृंगार सामग्री
• रोली (कुमकुम) और चंदन
• अक्षत: (ध्यान रहे चावल टूटे हुए न हों)
• फूल और माला: विशेषकर लाल रंग के फूल (जैसे गुड़हल या गुलाब) मां दुर्गा को बेहद प्रिय हैं
• इत्र (Perfume): माता रानी को अर्पित करने के लिए
• श्रृंगार की सामग्री: चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, काजल, शीशा, कंघी आदि (यह माता को अत्यंत प्रिय है)
3. आरती और हवन (दैनिक दीप-धूप) के लिए
• दीपक: मिट्टी या धातु का (घी या तिल के तेल के लिए)
• रुई की बत्ती (अखंड ज्योति जला रहे हैं तो कलावा की लंबी बत्ती)
• धूपबत्ती या अगरबत्ती
• कपूर (Camphor): आरती के लिए
• हवन सामग्री (यदि आप छोटा हवन करते हैं): आम की लकड़ी, हवन कुंड, सूखी गढ़ी (नारियल), लौंग का जोड़ा, बताशे और घी
4. भोग की सामग्री
• मिश्री और बताशे
• पंचमेवा: (काजू, बादाम, किशमिश, मखाने, छुहारे)
• ताजे फल: (विशेषकर केला, सेब या ऋतु फल)
• घर का बना प्रसाद: हलवा, पूरी या खीर (बिना लहसुन-प्याज के सात्विक रसोई में बना हुआ)
सुझाव: यदि आप गुप्त नवरात्रि में माता के स्वरूपों की विशेष साधना कर रहे हैं, तो पूजा में लाल रंग के आसन का प्रयोग करें और स्वयं भी लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनकर ही पूजा में बैठें।