कलावा (मौली या रक्षा सूत्र) हिंदू धर्म में पूजा, यज्ञ, व्रत और शुभ कार्यों के समय कलाई पर बाँधा जाने वाला पवित्र धागा है। इसे रक्षा, शुभता और संकल्प का प्रतीक माना जाता है। कलावा बाँधने के प्रमुख कारण
1. रक्षा का प्रतीक कलावा को रक्षा सूत्र भी कहा जाता है। इसे बाँधते समय ईश्वर से व्यक्ति की सुरक्षा, सुख और समृद्धि की कामना की जाती है।
2. शुभता का प्रतीक किसी भी शुभ कार्य, जैसे— • गृह प्रवेश • विवाह • यज्ञ • नामकरण • पूजा-पाठ से पहले कलावा बाँधना मंगलकारी माना जाता है।
3. धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताएं • सुरक्षा कवच (रक्षासूत्र): कलावा शब्द 'कला' से बना है, जिसका अर्थ होता है कलाई। इसे धारण करने से त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और तीनों देवियों (लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा) की कृपा प्राप्त होती है। यह नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा प्रदान करता है। • संकल्प का प्रतीक: किसी भी पूजा या अनुष्ठान के दौरान संकल्प लेते समय कलावा बांधा जाता है। यह याद दिलाता है कि व्यक्ति ने जो धार्मिक या नैतिक संकल्प लिया है, उस पर कायम रहना है।
4. पौराणिक कथा शास्त्रों के अनुसार, दानवीर राजा बलि की अमरता और सुरक्षा के लिए भगवान विष्णु (वामन अवतार) ने उनके हाथ में रक्षासूत्र बांधा था। इसके अलावा देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को अपना भाई मानकर उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था। तभी से कलाई पर कलावा बांधने की प्रथा चली आ रही है।
5. वैज्ञानिक और आयुर्वेद दृष्टिकोण • त्रिदोष का संतुलन: आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में वात, पित्त और कफ के असंतुलन से बीमारियां होती हैं। कलाई की नसें सीधे हृदय और शरीर के प्रमुख तंत्रों से जुड़ी होती हैं। कलावा बांधने से कलाई पर हल्का दबाव बनता है, जो इन तीनों दोषों को नियंत्रित रखने में मदद करता है। • रक्तचाप और स्नायु तंत्र: माना जाता है कि कलाई पर सूती धागे के दबाव से रक्त संचार (Blood Circulation) संतुलित रहता है और पक्षाघात (Paralysis), हृदय रोग या डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है। ________________________________________ बाँधने का सही नियम: पुरुषों और अविवाहित कन्याओं के दाहिने (Right) हाथ में तथा शादीशुदा महिलाओं के बाएं (Left) हाथ में कलावा बांधा जाता है। बांधते समय मुट्ठी में चावल या सिक्का रखकर हाथ सिर पर रखना शुभ माना जाता है। ________________________________________ कलावा बाँधते समय बोला जाने वाला मंत्र येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥ भावार्थ: जिस रक्षा सूत्र से महान दानवीर राजा बलि को बाँधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बाँधता हूँ। यह तुम्हारी रक्षा करे और सदैव अटल रहे।